क्या कोई भावनात्मक स्मृति आज रात के सपनों को प्रभावित कर सकती है?
हममें से बहुत से लोग कभी न कभी किसी स्मृति को मन में लिए सोने गए हैं। दिन शांत होने पर कोई सुखद पुनर्मिलन, दर्दनाक बातचीत या वर्षों पुराना कोई पल असामान्य रूप से निकट महसूस हो सकता है।
यह कल्पना करना आसान है कि ऐसी स्मृतियाँ हमारे सपनों में भी आ सकती हैं। लेकिन यह मान लेना एक अलग बात है कि उनके बारे में सपने देखने से उनका भावनात्मक प्रभाव कम हो जाता है।
एक नया प्रयोग इन दोनों विचारों की जाँच करता है।
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